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Friday, 6 February 2009



क़दीर ख़ान की रिहाई से अमरीका चिंतित

क़दीर ख़ान को पाकिस्तान में परमाणु बम का जनक कहा जाता है
पाकिस्तान के विवादास्पद परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की नज़रबंदी हटाने के अदालत के फ़ैसले पर अमरीका ने ग़हरी चिंता ज़ाहिर करते हुए इसकी आलोचना की है.
अमरीका ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि यह फ़ैसला 'खेदजनक' और 'दुर्भाग्यपूर्ण' है.
उसका कहना है कि अब्दुल क़दीर ख़ान अभी भी परमाणु सूचनाओं की तस्करी के लिए गंभीर ख़तरा हैं.
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल क़दीर ख़ान की नज़रबंदी हटाने के आदेश दिए हैं.
उन पर वर्ष 2004 में परमाणु तकनीकों और उपकरणों की तस्करी के आरोप लगे थे लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने माफ़ी दे दी थी.
लेकिन तभी से वे अपने घर पर नज़रबंद थे.
हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिए गए फ़ैसले में कहा है कि क़दीर ख़ान अब अपने घर से निकल सकते हैं और मेहमानों से मिल सकते हैं.
हालाँकि उन्हें पाकिस्तान से बाहर जाने से पहले उन्हें सरकारी अधिकारियों को सूचित करना होगा.
अमरीका की चिंता
अब्दुल क़दीर ख़ान ने ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को परमाणु सूचनाएँ बेचने की बात स्वीकार की थी.
इसके बाद से ही अमरीका चिंता जताता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की तकनीक पाकिस्तान से ही मिली है.
अमरीका हमेशा से चाहता था कि उसे क़दीर ख़ान से पूछताछ करने दी जाए लेकिन पाकिस्तान ने कभी इसकी अनुमति नहीं दी.
अब जब अदालत के फ़ैसले से उनकी नज़रबंदी हट गई है अमरीका ने गहरी चिंता ज़ाहिर की है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है, "मैं इस पर बहुत चिंतित हूँ."
जबकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गॉर्डन डुगुइड ने कहा है कि क़दीर ख़ान अभी भी परमाणु सूचनाओं की 'तस्करी का एक बड़ा ख़तरा' बने हुए हैं.
उनका कहना था कि अमरीका अब्दुल क़दीर ख़ान के बारे में अधिकारिक स्थिति पता करने की कोशिश कर रहा है.
'आज़ाद नागरिक'
क़दीर ख़ान के पक्ष में फ़ैसला आते ही पत्रकारों को उनसे मिलने की अनुमति मिली. उनका कहना था, "मैं आज़ाद हूँ. पहले पत्रकार मुझसे इस तरह नहीं मिल सकते थे."
मैं इस बात को लेकर ज़्यादा फ़िक्रमंद रहूँगा कि आप (पाकिस्तानी पत्रकार) मेरे बारे में क्या सोचते हैं, इसे लेकर नहीं कि बुश और डिक चेनी क्या सोचते हैं

अब्दुल क़दीर ख़ान
ये पूछे जाने पर कि इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या कहेगा, उन्होंने कहा, "उन्हें कहने दीजिए. क्या वे हमारे ख़ुदा से ख़ुश हैं? क्या वे हमारे पैगंबर से ख़ुश है? क्या वे हमारे नेताओं से ख़ुश हैं? कभी नहीं. तो फिर हम ये फ़िक्र क्यों करें कि वो हमारे बारे में क्या सोचते हैं."
उनका कहना था, "मैं इस बात को लेकर ज़्यादा फ़िक्रमंद रहूँगा कि आप (पाकिस्तानी पत्रकार) मेरे बारे में क्या सोचते हैं, इसे लेकर नहीं कि बुश और डिक चेनी क्या सोचते हैं."
परमाणु तस्करी में संलिप्त रहने के कुछ देशों के आरोपों के बारे में क़दीर ख़ान ने कहा, "मैं उनके प्रति जवाबदेह नहीं हूँ. मैं सिर्फ़ अपनी सरकार के प्रति जवाबदेह हूँ."
ये पूछे जाने पर कि क्या सरकार से उनकी कोई शिकायत है, तो उनका कहना था, "नहीं, कोई नहीं. ज़रदारी भी आठ साल जेल में रहे और नवाज़ शरीफ़ को भी देश निकाला दिया गया लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई मामला साबित नहीं हुआ. ये होता रहता है."
उन्होंने स्पष्ट किया कि देश छोड़ कर जाने का उनका कोई इरादा नहीं है. क़दीर ख़ान का कहना था, "मैं अपने देश में ही रहूँगा. अगर सरकार मुझसे किसी मामले पर सलाह लेना चाहती है तो मैं तैयार हूँ."
उनका कहना था कि अब वे अपना ध्यान शिक्षा की ओर केंद्रित करेंगे.

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