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Sunday, 8 February 2009

Abhi bhi ram ke nam par malai chahte hai

Abhi bhi ram ke nam par malai chahte hai
बचचा-बचचा राम का,कया परोगराम है शाम का--------------------------------------------------------------------------------------------------------िफर एक बार वही राग। बहुमत िमला तो राम मंिदर। अब भाजपा के इस मजाक को जनता समझ गई है। िपछले बीस सालों से भाजपा यही नारा दे रही है। नारे कई थे,समय के साथ बदले गए। ए पाटी िवद िडफरेंस। बचचा बचचा राम का जनम भूिम के काम का।कसम राम की खाते है मंिदर वहीं बनाएंगे। सैकड़ों और हजारों लोग इनके नारों के आवेश में आए,मारे गए। घर-घर ईंट का पूजन हुआ और पूरे देश में िहंदू लहर पैदा हुआ। हर बलाक में ईंट की पूजा बीस साल पहले हुई। बलाक से जुलूस जब िनकलता था देखने लायक होता था। उस समय अटल िबहारी वाजपेयी खुद लोगों को राम नजर आते थे और लाल कृषण आडवाणी लछमण थे। लेिकन समय बीतने के साथ ही जब सता का सवाद लगा तो जो जनता के साथ इनहोंने धोखा िकया वो सारा देश जानता है। कई बहाने बनाए और राम मंिदर की एक ईंट भी नहीं लगवा सके। यािन के इनहोंने सता पाने के िलए राम के साथ भी धोखा िकया।अब देिखए नारा था बचचा बचचा राम का जनम भूिम के काम का। इस कुछ समय पहले एक मुसिलम नेता ने मजे लेते हुए कहा। अब नारा भाजपा का बदल गया है। बचचा राम का जनम भूिम के काम का नारा बेमानी हो गया है। अब भाजपा का नारा है बचचा-बचचा राम का, कया परोगराम है शाम का।यािन के शाम को कया करोगे। आगे उनहोंने बताते हुए कहा िक इसका मतलब है िक शाम में कहां पैग-शैग का परोगराम है। िकतनी पेिटयां आज शाम को आ रही है। बाकी और कया इंतजाम है। कुछ तो रंगीिनयत का इंतजाम हो िजससे शाम मजेदार हो। नारा कुछ हद तक सही है। बंगारू लछमण की करतूत देख कर एेसा ही लगता है। िफर कई भाजपा के नेता सता की गिलयारों में कया करते है सारों को पता है। अंतर यही है। कांगरेसी करोड़ों में िबकते है,इनका सटैंडरड लो है, लाखों में ही िबक जाते है।अब एक बार िफर भाजपा को राम मंिदर याद आ गया है। कया िजस अिखल िहंदुतव की बात हो रही है वो अब है। खुद लाल कृष्ण आडवाणी इस बात को समझते है। आडवाणी पूरे देश में सवीकायॆ नहीं है। उनकी िसथित खराब है। उनकी पारटी के नेता ही उनहें नेता नहीं मानते है। आडवाणी िजस जाित से संबंिधत है उस जाित की इतनी हैिसयत नहीं िक वे उनहें सता में लाए। अटल िबहारी वाजपेयी कम से कम पंिडतों मे सवीकायॆ थे। इसके बाद देश के हर जाित के लोग िजसमें मुसिलम िबरादरी भी शािमल थे कमोबेश उनके साथ थी। उनके समरथक हर जाित में थे। पर आडवाणी के साथ िसथित बदल गई है। देश में जातीय राजनीित हावी है। अब इसके िलए आडवाणी ही िजममेवार नहीं है। आरएसएस की संकुिचत सोच भी िजममेवार है। आरएएस ने िहंदुतव का नारा तो िदया,लेिकन अपनी सामंती और पंिडतवादी सोच से बाहर नहीं िनकल सकी। यह सचचाई थी िक इस देश के िहंदू आंदोलन को मजबूती िपछड़ों ने दी। लेिकन हर वो िपछड़े नेताओं को हािशए पर लाया गया जो मजबूत होकर िनकला। संघ कायाॆलय में बैठे सािजशकारों ने उनहें पारटी से बाहर का रासता िदखाया। आज उमा भारती जैसी िहंदुतव के पैरोकार की कया िसथित भाजपा ने की। इसमें संघ के नेताओं की कया सािजश थी। यही हाल कलयाण िसंह के साथ हुआ। एक िपछड़े नेता ने जो िहंदुतव की वकालत की उसे भी हािशए पर लाया गया। झारखंड में बाबूलाल मरांडी के साथ कया िकया गया। यह भी झारखंड की आिदवासी जनता समझती है। भाजपा के मजबूत होते सोशल इंजीिनयिरंग के जनक गोिवंदाचायॆ जो शायद अगड़ी जाित के थे उनहें भी हािशए पर संघ ने लाया।यह सचचाई है िक राम मंिदर आंदोलन उस अगड़े मानिसकता का पिरचायक था िजनहोंने सता में आने के िलए ये सारा खेल िकया। इसके मोहर के रुप में िपछड़ों को इसतेमाल िकया गया। लेिकन जब सता आयी तो मलाई अगड़े लोग खाने लगे। इस मलाई के िहससेदार बने अरुण जेतली,परमोद महाजन,सुषमा सवराज,मुरली मनोहर जोशी और अनय नेता। यहीं से पारटी कई गुटों मे बंटने भी शुरू हो गई। सता का िसदांत होता है िक सता में आने के बाद सता की मलाई के बंटवारे को लेकर लड़ाई होती है। इस लड़ाई के कारण ही यूपी से भाजपा बाहर हो गई और िदलली से भी बाद में बाहर हो गई। मलाई के िहससेदारी को लेकर डा. जोशी और आडवाणी के बीच संघषॆ हुआ और आज जो िसथित है वो सामने है। वहीं अरुण जेतली, परमोद महाजन औऱ सुषमा सवराज की हालत सारे जानते है। ये कागजी नेता कुशल मैनेजमेंट के नाम पर पारटी पर कबजा कर गए और जमीनी नेताओं को हािशए पर ला िदया। खुद आडवाणी सारी सचचाई को जानते है। उनहें खुद महसूस होता होगा िक जब १९८९ में उनहोंने रथ यातरा िनकाली तो जनता का कया िरसपांस था और इसके बाद कई रथ यातरा उनहोंने िनकाली तो जनता का कया िरसपांस था? इस देश की जनता इतनी बेवकूफ तो है नहीं िक उनहें वललभ पटेल का परितरुप मान वोट दे दे। आंखों से आंसू िनकालने से वोट तो िमलता नहीं। जनता को जमीनी काम चािहए,भाषण नहीं। आज भाजपा में वो नेता है िजनका जमीन नहीं है। पर वोट सारे समुदाय का चाहते है। दो मुसलमान भाजपा में घुूमते है। दोनों की हैिसयत कया है सारे लोग जानते है। मुखतार नकवी और शहनवाज हुसैन िकतने मुसिलम वोट िदलवा सकते है ये भाजपा के लोग जानते है। इन दोनों का झगड़ा भी इस कदर है िक एक दूसरे का खून पी जाए। शहनवाज हुसैन हमेशा ये आरोप लगाते है िक नकवी कुछ िहंदू लड़कों को मुसिलम टोपी पहना कर भाजपा आिफस में लाते है, अपनी वाहवाही लेते है। जबिक एेसी कुछ िटपपणी शहनवाज के बारे में भी की जाती है। वे िबहार में जनाधारहीन नेता है और कोई भी मुसलमान उनके साथ नहीं है। भाजपा के कैडर और िनतीश कावोट बैंक उनहें जीताता है।आज संघ की हालत कया है ये शायद कम लोगों को पता है। संघ की हालत इस समय सबसे जयादा खराब है। इनकी शाखाओं की संखया कम हो गई है। पूरे देश में इनकी शाखाओं की संखया िजतनी थी उसकी आधी ही अब पूरे देश में है। इनके समरथकों में हताशा है। उनका कहना है िक वे िकस संघ की बात करे। यह भी सािजश का अडडा है। िकस संघ की बात करे। मदनदास देवी का संघ या मोहन भागवत का संघ। िफर ये भी हलुआ पूरी के गुलाम है। भाजपा के नेताओं ने इनहें भरषट कर िदया है। इनहें भी हरे-हरे नोट पहुंचा कर सारे िसदांत भूलवा िदया है।ये भी उनहीं भाजपा नेताओं के साथ जो उनहें पूरी खाितरदारी करते है। ये भी अब दौरों पर संघ कारयालय नहीं बिलक पाइव सटार होटलों में ठहरते है। इनहें भी अब एयरकंिडशन कार चािहए। िफर कहां राम मंिदर बनेगा। िजन परदेशों में संघ ने भाजपा पर िनयंतरण रखने के िलए संगठन मंतरी भेजे है वो भी भरषट हो चुके है। उनहें भी परदेश के भाजपा मंतिरयों ने खरीद िलया है। ये संगठन मंतरी भी पारटी को मजबूत करने के बजाए अांतिरक सािजशों को हवा देते है। तािक मंतरी आए है और आशीरवाद लेकर जाए। इस पूरे खेल को आरएसएस के नीचले सतर के कारयकरता समझ चुके है और वे अब उदासीन है। उनका कहना है िक संघरष हम करे और मलाई ये खाए। कोई जायज काम लेकर जाए तो अनुशासन पढाते है। जबिक यही काम कोई पैसे लेकर जाता है तो वे करते है। अब आडवाणी की समसया कहां से आ रही है। पीएम इन वेिटंग की समसया यह है िक वे अपनी पारटी में िघर गए है। इनके साथ कागजी घोडे है। जमीनी सतर पर वे हवा है। अरुण जेतली,सुषमा सवराज कागजी पलान बना सकते है। िदलली में डराइंग रुम में अपनी पालिटकस कर सकते है। पर वे वोट िखंचने की िसथित में नहीं है। यही हाल पारटी अधयछ राजनाथ िसंह के है। ये पूरवी यूपी के कुछ ठाकुरों के नेता है। इनहें दूसरे राजयों तो कया यूपी में ही पूरी तरह से अभी तक सवीकार नहीं िकया गया है। जबिक एक डा.जोशी मायावती से सांठगाठ कर आडवाणी को नुकसान पहुंचाने में लगे है। अपनी जीत को पककी करने के िलए वे बसपा को कम से कम दस सीटों पर मदद करेंगे। अब आडवाणी को जयादा खतरा बाहर से नहीं भीतर से है। उधर नरेंदर मोदी भी शायद ही चाहे की आडवाणी इस बार जीते। कयोंिक अगर आडवाणी पीएम बन गए तो खतरा मोदी को है। वे अगले आम चुनाव में पीएम के तौर पर परोजेकट होना चाहते है। अगर आडवाणी पीएम बन गए तो उनका अगले आम चुनाव का चांस चला जाएगा। कयोंिक इस देश में पीएम बनने के बाद पीएम जवान हो जाता है। उसकी एज बढ़ जाती है।

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