तब शांति की बातें की थीं प्रभाकरण ने May 19, 08:37 pm
लंदन [पीटर पोहम]। उत्तारी श्रीलंका के वन्नी के घने जंगलों में रहने वाला आधुनिक समय का सबसे एकांतप्रिय नेता। बेहद रहस्यमयी और गूढ़ व्यक्तित्व। बीते दो दशक से उसने कोई इंटरव्यू नहीं दिया था। तब तक [वर्ष 2002] किसी के पास उसकी न तो कोई फोटो थी और न कोई पता-ठिकाना। तब तक सिर्फ एक पत्रकार ने उससे मिलने की कोशिश की थी। संडे टाइम्स की मैरी काल्विन इस कोशिश में नाकाम तो रहीं हीं, अपनी एक आंख भी गंवा बैठीं।
लेकिन 2002 में नार्वे ने दशकों से श्रीलंका में लड़ रहे दोनों पक्षों [लिंट्टे और श्रीलंका सरकार] को सुलह के लिए बातचीत की मेज पर ला दिया। दोनों पक्ष संघर्ष विराम के लिए तैयार हो गए। और तभी लिट्टे [लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम] प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को एहसास हुआ कि दुनिया के सामने आने का यही सही वक्त है। उसने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई।
लेकिन समर्थकों के बीच थांबी [छोटा भाई] के नाम से चर्चित प्रभाकरण कोई खतरा नहीं उठा सकता था। प्रेस कांफ्रेंस घने जंगलों के बीच कड़ी सुरक्षा में बुलाने का फैसला लिया गया। पत्रकारों के दल में मैं भी शामिल था। वार्ता से 24 घंटे पहले हमें किलिनोच्चि पहुंचने को कहा गया। हम वहां नियत समय पर पहुंच गए। आधा दिन बीत चुका था। तभी वैनों का एक काफिला पहुंचा। हमें लेकर वैन घने जंगलों में घुस गई। हम जहां उतरे हमारे सामने एक छोटा सा घर था, जिसकी छत टीन की थी। हमारे पास जो भी चीजें थीं, उसे वहीं छोड़ने के लिए कहा गया। हमारे कान, मुंह और मोजों की कड़ी तलाशी ली गई। यह लिट्टे की राजनीतिक अकादमी थी।
कुछ देर के इंतजार के बाद प्रभाकरण हमारे सामने था। वह शख्स, जिसने आत्मघाती हमलों की खोज की थी। इस अचूक हथियार से उसने देश के सैकड़ों नागरिकों के अलावा दक्षिण एशिया के दो प्रमुख नेताओं की हत्या की। उसने हरे रंग की वर्दी पहन रखी थी। बाडीगार्ड्स से घिरा हुआ वह कद में छोटा और दिखने में 47 साल से ज्यादा का नहीं था।
इस मुलाकात को संभव बनाया था एंटन बालासिंघम ने। एंटन कोलंबो स्थित ब्रिटिश उच्चायुक्त में पूर्व कर्मचारी था। वह लंबे समय तक टाइगर्स की राजनीतिक मस्तिष्क माना गया। माना जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी [21 मई 1991] और श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रेमदासा [एक मई 1993] की हत्या के लिए वही जिम्मेदार था। टाइगर्स को ब्रिटेन व अमेरिका ने आतंकी संगठन करार दे दिया। तमिलों को डरा कर और अपने प्रतिद्वंद्वियों को मारकर उसने सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली। जब लिट्टे ने जाफना प्रायद्वीप पर नियंत्रण किया तो 24 घंटे के भीतर मुस्लिम समुदाय के 40 हजार लोगों को इलाका छोड़ देने के लिए कह दिया गया।
बहरहाल, प्रेस कांफ्रेंस में प्रभाकरण ने अपनी धीमी आवाज में जोर देकर कहा कि वह सुलह के लिए तैयार है। उसने कहा कि टाइगर्स की तमिल राष्ट्र, राष्ट्रीयता और आत्म निर्भरता की मांग है। लेकिन मूलभूत मांगों को स्वीकार करने व हमारे लोगों के संतुष्ट होने की स्थिति में हम अलग तमिल राष्ट्र [ईलम] की मांग छोड़ने पर विचार करेंगे।
राजीव गांधी हत्याकांड के बारे में उसने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है। दस साल पहले की वह घटना घटी बेहद दुखद थी। छापामार लड़ाई को लेकर उसने कहा कि अब हमने शांति की राह पर चलने का फैसला किया है। इसलिए इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहते।
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