फिल्मी होली गीतों की निराली है छटा
Mar 10, 07:38 pm
नई दिल्ली। रंग और उमंग का त्योहार होली बॉलीवुड की फिल्मों का अभिन्न हिस्सा रहा है। नए और पुराने अनेक फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों में होली के गीतों को विभिन्न रूपों में बडे़ ही कलात्मक ढंग से पेश किया है और माहौल को हल्का करने तथा नायक और नायिका के मनोभावों को व्यक्त करने के लिए इनका सहारा लिया है।
होली के इन गीतों की विशेष बात यह रही है कि इनका चित्रण और नृत्य संयोजन बेहद प्रभावी ढंग से किया गया तथा लगभग सभी गीत लोकगीतों पर आधारित थे, जिससे ये गीत काफी मकबूल हुए। इन गीतों में नायक-नायिका की छेड़छाड़, मोहब्बत का इजहार, विरह की व्याकुलता, मनुहार, उलाहना, बदले की भावना, उल्लास, प्रेम के लिए आमंत्रण आदि विभिन्न भावों का सुंदर निरूपण हुआ है।
पहले फिल्मों में होली का एक न एक गीत जरूर रहता था। अब भी कुछ फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों में होली के गीत रखते हैं, लेकिन इन गीतों की संख्या पहले की अपेक्षा काफी कम हो गई है।
पुरानी फिल्मों में होली के कई गीत बेहद मकबूल हुए थे, जिनमें प्रमुख है तन रंग लो जी आज मन रंग लो.[कोहिनूर], बिरज में होली खेलत नन्दलाल..[गोदान], होली आई रे कन्हाई..[मदर इंडिया], जा रे हट नटखट न छूना मेरा घूंघट..[नवरंग], फागुन आयो रे..[फागुन] आदि। होली के फिल्मी गीतों की यह रंग धारा आज भी अजस्र बह रही है। पिछले चार दशक के दौरान भी कई ऐसी फिल्में परदे पर आई जिनके होली गीतों ने धूम मचा दी। ब्लाकबस्टर फिल्म शोले का गीत होली के दिन दिल खिल जाते हैं..चारों ओर रंग, अबीर और गुलाल के उत्सवी माहौल में अभिनेत्री हेमामालिनी के दिलकश नृत्य के साथ इस मनोहारी ढंग से पेश किया गया था कि वह आज तक भी लोगों की स्मृति में ताजा है। इसी तरह यश चोपड़ा की फिल्म सिलसिला में प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और संतूर वादक पंडित शिव कुमार के संगीत निर्देशन में अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया होली गीत रंग बरसे भीगी चुनर बाली रंग बरसे.. आज भी होली के मौके पर गाया जाता है। सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन का लिखा यह गीत फिल्मी होली गीतों में एक अलग ही मुकाम रखता है। फिल्म कटी पतंग के होली गीत आज न छोडे़ंगे बस हमजोली खेलेंगे हम होली..का अपना अलग ही अंदाज है। इसमें शोखी और उमंग के साथ ही नायिका पर नायक की अधिकार भावना भी प्रकट होती है।
निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा ने अपनी कई फिल्मों में होली के गीत रखे। सिलसिला के बाद उनकी फिल्म मशाल का होली गीत ओ देखो होली आई.. भी बेहद लोकप्रिय हुआ। हृदयनाथ मंगशेकर ने इस गीत के लिए बड़ी ही मधुर धुन बनाई थी। बदले की भावना से प्रेरित एक होली गीत फिल्म जख्मी में देखने को मिला था। इसमें नायक सुनील दत्ता दिल में बदले की आग लिए दिल में होली जल रही.. गीत गाता नजर आता है।
सामान्य तौर पर होली के प्रसंगों को कृष्ण और राधा तथा अन्य गोपियों की लीलाओं और अठखेलियों से जोड़ा जाता है। इसी को अभिव्यक्त करता गीत होली खेले बिरज में नंद लाला..फिल्म राजपूत में रखा गया था।
कुछ समय पहले प्रदर्शित फिल्म बागबान में निर्माता-निर्देशक रवि चोपड़ा ने होली खेले अवध में रघुवीरा..गीत के जरिए धार्मिक मान्यताओं पर आधारित राधा-कृष्ण के होली प्रसंगों से अलग इस पर्व को एक नई अवधारणा से जोड़ दिया। होली के गीतों को लगभग सभी फिल्म निर्माताओं ने हालांकि सुरुचिपूर्ण ढंग से अपनी फिल्मों में प्रदर्शित किया है, लेकिन कुछ फिल्मकार ऐसे भी हैं जिन्होंने सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और एकता के रंग से सराबोर इस पर्व को बेरंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन फिल्मों में होली के दृश्य अनावश्यक और ठूंसे गए लगे थे। सावन कुमार की फिल्म सौतन में फिल्माए गीत मेरी पहले ही थी तंग चोली..ने तो अश्लीलता और भोंडेपन के चलते शालीनता को ताक पर रख दिया था। बहरहाल आज की फिल्मों में भी होली गीतों को स्थान देने की परंपरा अभी टूटी नहीं है और गाहे-बगाहे फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों में होली गीतों को समुचित स्थान दे रहे हैं।
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