Tuesday, 12 May 2009
मेरी जन्म दाता माँ श्री मति गणेशी बाई दी हत्या के बाद जब मैंने अपनी ड्यूटी पुंजाब विधान सभा की कैंटीन में मिस्टर कान्ते के साथ की थी और पुंजाब के मोजु
La vie, c'est un arbre sec ....NAGPAL PARIS

La vie, c'est un arbre sec ....NAGPAL PARIS
Oui Mesdames et Messieurs, notre vie est un arbre sec dont toutes les fleurs et les fruits sont,tombés par levent qui a souffle. Notre vie est un arbre sec vide par la tempéte. Notre vie, comme on le sent, est trés triste et tres mauvaise. Alores sentez votre vie comme un abre sec.Si l' arbre avec ses fruties est sauvé de la templéte alors les fruits seront sauvés de ne pas tomber. Alors, avec fieté on peuf dire que notre vie est un arbre sec, qui n'a pas àse sauver de la mort puisque aprés la tempéte, quand le beau temps revient, l'arbre refieurit, comme notre vie, aprés la tempéte les bons moments revient vie, apreés la tempéte, les bons moments reviennent.
Dharamvir Nagpal
Chief News Reporter/Editor
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75018 Paris
(F R A N C E )
Monday, 11 May 2009
धरमवीर नागपाल
चीफ न्यूज़ रिपोर्टर/एडिटर
पेरिस फ्रांस
Friday, 8 May 2009

4 young Tamil from France,
aged 23 to 27 years
began a hunger strike complete
without food or water
until a concrete action by the international community save the Tamil people threatened by the Sri Lankan government.
Tuesday, 5 May 2009
राजनीतिक रूप से बालिग हुए राहुल
राजनीतिक रूप से बालिग हुए राहुल
- संजीव श्रीवास्तव
- 5 May 09, 06:21 PM

जनवरी 2004 में जब प्रियंका गाँधी अपने भाई राहुल को पहली बार मीडिया और अमेठीवासियों से मिलवा रही थीं तो कई और पत्रकारों के साथ मैं भी वहाँ मौजूद था.
राहुल सबसे मिले. लेकिन उनमें काफ़ी हिचकिचाहट थी. कुछ शर्मीले और अंतरमुखी हैं भी वे. कुछ जगह वह लोगों से मुखातिब भी हुए. शायद एक-आध भाषण भी हुआ था. कुछ पक्का ध्यान नहीं पड़ता. लेकिन हम सभी पत्रकारों का निष्कर्ष लगभग एक ही था.
राहुल अपनी उम्र से भी ज्यादा छोटे और राजनीतिक पप्पू या कच्ची कौड़ी लगते थे.
इन पाँच वर्षों में कई बार राहुल को देखने-सुनने का मौक़ा मिला. सभी अनुभव से सीखते हैं. राहुल भी सीखें हैं, बदले हैं और बड़े हुए हैं.
और मंगलवार को जब राहुल दिल्ली में प्रेस कांफ़्रेस कर रहे थे तो उन्हें सुनते हुए मैं सोच रहा था कि 2009 की चुनावी मुहिम के दौरान कैसे देखते-देखते जैसे राहुल राजनीतिक रूप से बालिग हो गए हैं और मीडिया एवम् आम जनता कि नज़र में कैसे पार्टी महासचिव रहते हुए भी वह कांग्रेस के शीर्ष नेता बन गए हैं.
वर्ष 2004 का राजनीतिक पप्पू सयाना हो गया है. उसकी बातों में, पत्रकारों को उत्तर देने के तेवर और अंदाज़ में एक नया विश्वास और परिपक्वता है.
पिछले पाँच वर्षों के अपने सफ़र में राहुल ने हिचकिचाहट, अनिश्चय और राजनीतिक बातों के प्रति अपनी उदासीनता को पीछे छोड़ा है पर अपनी ताज़गी और ईमानदारी को बरक़रार रखा है.
बहुत लोगों का मानना है कि राहुल गाँधी मे एक 'सिनसेरिटी' या ईमानदारी तो है पर अपनी बहन प्रियंका जैसा करिश्माई जादुई व्यक्तित्व नहीं है.
100 लोगों के समूह के साथ बातचीत में तो राहुल का कोई सानी नहीं है पर जनसभा में एकत्रित भीड़ के साथ वह उस तरह का डायलॉग या संबंध नहीं स्थापित कर पाते जो एक 'नेचुरल' नेता या राजनीतिज्ञ कर सकता है.
अंतर शायद स्टाइल और सब्सटैंस का है. राहुल के पास सोच या सब्सटैंस तो है. उनके समर्थकों का कहना है स्टाइल भी जनसैलाब को लुभाने का और उससे सीधा रिश्ता बनाने का धीरे-धीरे आ जाएगा.
- संजीव श्रीवास्तव
- 5 May 09, 06:21 PM
जनवरी 2004 में जब प्रियंका गाँधी अपने भाई राहुल को पहली बार मीडिया और अमेठीवासियों से मिलवा रही थीं तो कई और पत्रकारों के साथ मैं भी वहाँ मौजूद था.
राहुल सबसे मिले. लेकिन उनमें काफ़ी हिचकिचाहट थी. कुछ शर्मीले और अंतरमुखी हैं भी वे. कुछ जगह वह लोगों से मुखातिब भी हुए. शायद एक-आध भाषण भी हुआ था. कुछ पक्का ध्यान नहीं पड़ता. लेकिन हम सभी पत्रकारों का निष्कर्ष लगभग एक ही था.
राहुल अपनी उम्र से भी ज्यादा छोटे और राजनीतिक पप्पू या कच्ची कौड़ी लगते थे.
इन पाँच वर्षों में कई बार राहुल को देखने-सुनने का मौक़ा मिला. सभी अनुभव से सीखते हैं. राहुल भी सीखें हैं, बदले हैं और बड़े हुए हैं.
और मंगलवार को जब राहुल दिल्ली में प्रेस कांफ़्रेस कर रहे थे तो उन्हें सुनते हुए मैं सोच रहा था कि 2009 की चुनावी मुहिम के दौरान कैसे देखते-देखते जैसे राहुल राजनीतिक रूप से बालिग हो गए हैं और मीडिया एवम् आम जनता कि नज़र में कैसे पार्टी महासचिव रहते हुए भी वह कांग्रेस के शीर्ष नेता बन गए हैं.
वर्ष 2004 का राजनीतिक पप्पू सयाना हो गया है. उसकी बातों में, पत्रकारों को उत्तर देने के तेवर और अंदाज़ में एक नया विश्वास और परिपक्वता है.
पिछले पाँच वर्षों के अपने सफ़र में राहुल ने हिचकिचाहट, अनिश्चय और राजनीतिक बातों के प्रति अपनी उदासीनता को पीछे छोड़ा है पर अपनी ताज़गी और ईमानदारी को बरक़रार रखा है.
बहुत लोगों का मानना है कि राहुल गाँधी मे एक 'सिनसेरिटी' या ईमानदारी तो है पर अपनी बहन प्रियंका जैसा करिश्माई जादुई व्यक्तित्व नहीं है.
100 लोगों के समूह के साथ बातचीत में तो राहुल का कोई सानी नहीं है पर जनसभा में एकत्रित भीड़ के साथ वह उस तरह का डायलॉग या संबंध नहीं स्थापित कर पाते जो एक 'नेचुरल' नेता या राजनीतिज्ञ कर सकता है.
अंतर शायद स्टाइल और सब्सटैंस का है. राहुल के पास सोच या सब्सटैंस तो है. उनके समर्थकों का कहना है स्टाइल भी जनसैलाब को लुभाने का और उससे सीधा रिश्ता बनाने का धीरे-धीरे आ जाएगा.
Monday, 4 May 2009
ਬਸੰਤੀ ਨੇ ਕੀਤੀ ਅਡਵਾਨੀ ਦੀ ਹਿਮਾਇਤ

| ਬਸੰਤੀ ਨੇ ਕੀਤੀ ਅਡਵਾਨੀ ਦੀ ਹਿਮਾਇਤ | |
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| ਅਭਿਨੇਤਰੀ ਅਤੇ ਭਾਜਪਾ ਆਗੂ ਹੇਮਾ ਮਾਲਿਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਭਾਜਪਾ ਨੇਤਾ ਲਾਲਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਅਡਵਾਨੀ ਵਿਚ ਪ੍ਰਧਾਨਮੰਤਰੀ ਬਣਨ ਦੀਆਂ ਸਭ ਖੂਬੀਆਂ ਮੌਜੂਦ ਹਨ. ਹੇਮਾ ਮਾਲਿਨੀ ਨੇ ਭਾਜਪਾ ਉਮੀਦਵਾਰ ਅਤੇ ਸਾਬਕਾ ਕ੍ਰਿਕੇਟ ਖਿਡਾਰੀ ਨਵਜੋਤ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ ਦੇ ਸਮਰਥਨ ਵਿਚ ਇੱਕ ਚੋਣ ਰੈਲੀ ਵਿਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅਡਵਾਨੀ ਇੱਕ ਨਿਮਰ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਆਦਮੀ ਹਨ ਅਤੇ ਪ੍ਰਧਾਨਮੰਤਰੀ ਦੀ ਕੁਰਸੀ 'ਤੇ ਬੈਠਣ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਵਿਚ ਸਭ ਖੂਬੀਆਂ ਹਨ. ਅੱਤਵਾਦ ਦੇ ਵੱਧਦੇ ਡਰ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਦਿੰਦਿਆਂ ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇਕਰ ਭਾਜਪਾ ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਸੱਤਾ ਵਿਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪਾਰਟੀ ਇਸ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਜੜੋਂ ਉਖਾੜਨ ਲਈ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੇਗੀ. ਸਿੱਧੂ ਲਈ ਵੋਟ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕਰਦਿਆਂ ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇਕਰ ਲੋਕਾਂ ਵਿਚ 'ਬਸੰਤੀ' ਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਕੋਈ ਸਨਮਾਣ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਿੱਧੂ ਲਈ ਭਾਰੀ ਮਤਦਾਨ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ. |
